दमोह विधानसभा को SC वर्ग के लिए आरक्षित करने की मांग: बसपा ने चुनाव आयोग को सौंपा ज्ञापन |
दमोह
दमोह। बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने दमोह विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 55 को अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित करने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। बसपा के जिला प्रभारी एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी कोमल अहिरवार ने जिला निर्वाचन अधिकारी सुधीर कोचर के माध्यम से भारतीय निर्वाचन आयोग, दिल्ली के नाम एक विस्तृत आवेदन पत्र सौंपा।
प्रमुख तर्क: जनसंख्या और संवैधानिक मानक..कोमल अहिरवार ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया कि दमोह जिले की चारों विधानसभाओं में अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाताओं की संख्या लगभग 45 से 50 हजार है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि:
* जनसंख्या का प्रभुत्व: दमोह विधानसभा में अनुसूचित जाति का प्रतिशत जिले की अन्य तीन विधानसभाओं की तुलना में लगभग 5% अधिक है।
* ऐतिहासिक उपेक्षा: 1952 से 2023 तक कुल 17 बार चुनाव हुए, लेकिन आज तक इस सीट को आरक्षित नहीं किया गया।
* परिसीमन में विसंगति: आरोप लगाया गया कि राजनीतिक दबाव के कारण कभी पथरिया तो कभी हटा विधानसभा को आरक्षित किया गया, जबकि मानक के अनुसार दमोह विधानसभा सबसे प्रबल दावेदार है।
“दमोह विधानसभा संवैधानिक मानकों पर खरी उतरती है, फिर भी इसे जानबूझकर सामान्य रखा गया ताकि एक विशेष वर्ग का राजनैतिक वर्चस्व बना रहे।” – कोमल अहिरवार
वर्चस्व की राजनीति पर प्रहार...बसपा नेता ने सीधे तौर पर हमला बोलते हुए कहा कि दमोह विधानसभा पर लंबे समय से दो प्रभावशाली परिवारों का कब्जा रहा है। इन परिवारों ने अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए दलित समाज के संवैधानिक अधिकारों का हनन किया और इस क्षेत्र को आरक्षित होने से रोका। इससे अनुसूचित जाति वर्ग राजनैतिक प्रतिनिधित्व से वंचित रहा है।
2028 के चुनाव के लिए मांग…आवेदन के अंत में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से निवेदन किया गया कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रतिपादित सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों का सम्मान करते हुए, आगामी 2028 के विधानसभा चुनाव में दमोह क्षेत्र क्रमांक 55 को अनुसूचित जाति हेतु आरक्षित घोषित किया जाए।
यह पत्र जिले के समस्त अनुसूचित जाति वर्ग के सामाजिक और राजनैतिक कार्यकर्ताओं की सामूहिक भावनाओं के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।