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अशोकनगर में कब थमेगा दलितों पर दमन?

Ashoknagar

अशोकनगर : सरेआम गुंडागर्दी! नाश्ता लेने गए दलित युवक को डंडों से पीटा, जातिसूचक गालियां देकर बेकरी से भगाया।

[ईसागढ़, अशोकनगर] मध्य प्रदेश का अशोकनगर जिला एक बार फिर जातिवादी मानसिकता और दलित उत्पीड़न की आग में झुलस रहा है। ताजा मामला ईसागढ़ के चंदेरी तिराहे का है, जहाँ मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है।

क्या एक दलित का दुकान पर जाना अपराध है?

यह घटना 5 जनवरी 2026 की है।प्राप्त जानकारी के अनुसार फरियादी हेमंत सेहरिया (35 वर्ष), निवासी नागघाटी, दिनांक 5 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 1:00 बजे चंदेरी तिराहा स्थित कुशवाह बेकरी पर नाश्ता लेने गया था।  उसे क्या पता था कि उसकी जाति उसके सम्मान और शरीर पर भारी पड़ जाएगी।

दुकानदार अनिल कुशवाह ने नाश्ता देने के बजाय हेमंत को देखते ही जहर उगलना शुरू कर दिया। आरोप है कि उसने सरेआम कहा— “तू सेहरिया बार-बार हमारी दुकान पर क्यों आता है?” यह सवाल सिर्फ हेमंत से नहीं, बल्कि पूरे समाज की व्यवस्था से है। क्या अब सामान खरीदने से पहले जाति बतानी होगी?

बेरहमी की हद: डंडों से हमला और सामूहिक मारपीट

विवाद यहीं नहीं रुका। गाली-गलौज के बीच धर्मेंद्र कुशवाह और भोला कुशवाह भी वहां पहुँच गए। भोला कुशवाह ने हाथ में डंडा लेकर हेमंत के पैर के घुटने पर जोरदार हमला किया। जब पीड़ित दर्द से कराह रहा था, तब बाकी आरोपियों ने उसे घेरकर पीटा।

> चश्मदीदों की गवाही: मौके पर मौजूद पंकज जैन और संजय भान ने किसी तरह बीच-बचाव कर हेमंत की जान बचाई, वरना यह हमला और भी घातक हो सकता था।

प्रशासन की चुप्पी और बढ़ता आक्रोश

अशोकनगर में दलितों पर अत्याचार का यह कोई पहला मामला नहीं है। आंकड़े गवाह हैं कि मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति/जनजाति के खिलाफ अपराधों की दर चिंताजनक है। हेमंत ने हिम्मत दिखाते हुए अपनी पत्नी और माँ के साथ थाने पहुंचकर FIR दर्ज कराई है, लेकिन सवाल वही है:

* क्या दबंगों में कानून का खौफ खत्म हो चुका है?

* क्यों छोटी-छोटी बातों पर दलितों को निशाना बनाया जा रहा है?

* क्या पुलिस आरोपियों पर ऐसी कार्रवाई करेगी जो मिसाल बने?

इस मामले में दीना भाना बहुजन संगठन की अपील: दीना भाना बहुजन संगठन ले लोगों ने कहा कि प्रशासन को इस मामले में कड़ी से कड़ी धाराएं लगाकर आरोपियों को जेल भेजना चाहिए, ताकि ईसागढ़ की सड़कों पर फिर किसी हेमंत को अपनी जाति की वजह से लहूलुहान न होना पड़े।

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