दमोह की ‘बड़ी शाला’ में करोड़ों का खेल? 600 एकड़ जमीन वाले मंदिर ट्रस्ट में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप |
अशोक नगर
दमोह (सीतानगर): मध्य प्रदेश के दूसरे सबसे अमीर मंदिरों में शुमार, पथरिया तहसील के ‘श्री देव रामकुमार जानकी रमण मंदिर लोक न्यास’ (बड़ी शाला) में इन दिनों घमासान मचा हुआ है। आरोप है कि ट्रस्ट की लगभग 600 एकड़ कृषि भूमि और करोड़ों की चल-अचल संपत्ति को खुर्द-बुर्द किया जा रहा है।
मामला क्या है? महंत हरिप्रपन्नदास जी के स्वर्गवास के बाद, ट्रस्ट के प्रबंधन को लेकर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि संतोष बिल्थरे और अनुज टंडन द्वारा ट्रस्ट की संपत्ति का दुरुपयोग किया जा रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, कलेक्टर दमोह ने 13 नवंबर 2024 को स्पष्ट आदेश दिया था कि विवादित स्थिति को देखते हुए एसडीएम (SDM) पथरिया को प्रबंधक और तहसीलदार को सहायक प्रबंधक नियुक्त किया जाए।
भ्रष्टाचार के बड़े आरोप: * रिश्वत का आरोप: शिकायत में सनसनीखेज आरोप लगाया गया है कि संतोष बिल्थरे के नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय में भारी लेनदेन हुआ।
* सोने के मुकुट गायब? मंदिर के भगवान राम, लक्ष्मण और सीता जी के लगभग 2 किलो सोने के मुकुट गायब होने या बदले जाने की आशंका जताई गई है।
* फर्जी बिलिंग: पूर्व महंत की तेरहवीं और पुण्यतिथि आयोजनों में लाखों रुपये का फर्जी खर्च दिखाने का आरोप है। खर्च 5 लाख हुआ, जबकि कागजों पर 25 लाख दर्शाया गया।
* कृषि उपकरणों का दुरुपयोग: न्यास के 4 ट्रैक्टर, 20 मोटर पंप और लग्जरी गाड़ियों (XUV 500, थार) का निजी हितों के लिए उपयोग हो रहा है।
प्रशासनिक लापरवाही: सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कलेक्टर महोदय ने एसडीएम को न्यास का ‘अस्थायी प्रबंधक’ नियुक्त कर दिया था, तो अब तक प्रशासन ने संपत्तियों को अपने कब्जे में क्यों नहीं लिया? इसी ढिलाई का फायदा उठाकर आरोपी कथित तौर पर मंदिर के गोदामों में रखा अनाज और अन्य सामग्री खुर्द-बुर्द कर रहे हैं।
आगे क्या? मामला…. वर्तमान में जिला न्यायाधीश दमोह के समक्ष रिफरेंस के लिए प्रेषित है, लेकिन स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि भगवान की संपत्ति को निजी स्वार्थ की भेंट चढ़ाया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि कलेक्टर महोदय इस लिखित शिकायत पर क्या कड़ा एक्शन लेते हैं।
दमोह से रिपोर्टर: अशोक अहिरवार की खबर

