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प्रेरणा की मिसाल: लखनऊ में मिली मदद का कर्ज अशोकनगर में चुकाया |

अशोकनगर

प्रेरणा की मिसाल: लखनऊ में मिली मदद का कर्ज अशोकनगर में चुकाया; एडवोकेट इंद्राज ने रक्तदान कर बचाई महिला की जान…..अशोकनगर | जिला संवाददाता*

कहते हैं कि इंसान द्वारा किया गया नेक काम कभी व्यर्थ नहीं जाता, वह लौटकर समाज के पास जरूर आता है। ऐसा ही मामला अशोक नगर जिले से सामने आया है,

जिला अस्पताल में गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में अशोक नगर जिले के ग्राम खेजरा खुर्द निवासी एडवोकेट इंद्राज ने एक अनजान महिला के ऑपरेशन के लिए रक्तदान कर न केवल मानवता की मिसाल पेश की, बल्कि अपने अतीत के एक ‘कर्ज’ को भी चुकाया।

*जब ट्रेनिंग के दौरान खुद हुए थे बीमार*……..इस नेक कार्य के पीछे एडवोकेट इंद्राज की एक पुरानी प्रेरणा छिपी है। उन्होंने बताया कि जब वे अपनी प्रोफेशनल ट्रेनिंग के सिलसिले में लखनऊ में थे, तब उनकी तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई थी। उस कठिन समय में उनके ट्रेनर्स और कैंपस के साथियों ने दिन-रात उनकी देखरेख की और मदद की थी। इंद्राज कहते हैं, “लखनऊ में साथियों से मिली उस मदद ने मुझे सिखाया कि एक-दूसरे का हाथ थामने से न केवल जान बचती है, बल्कि व्यक्ति का मनोबल भी बढ़ता है। मैंने तभी तय कर लिया था कि जब भी मौका मिलेगा, मैं यह कर्ज जरूर उतारूंगा।

परिजनों की बेबसी देख नहीं रुके कदम……….गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में इंद्राज जब जिला अस्पताल पहुंचे, तो उन्होंने ग्राम सलमाई निवासी शशि यादव के परिजनों को बेहद परेशान देखा। महिला का बच्चेदानी का ऑपरेशन होना था, लेकिन डोनर नहीं मिल रहा था। परिजनों में से दो लोग किडनी के मरीज होने के कारण खून देने में असमर्थ थे। एडवोकेट इंद्राज ने जैसे ही यह सुना, उन्हें अपना लखनऊ का दौर याद आ गया और उन्होंने तुरंत रक्तदान करने का फैसला लिया।

*आज का दिन सबसे खास*…….सफल रक्तदान के बाद इंद्राज ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आज का दिन उनके जीवन का सबसे यादगार दिन है। उन्होंने कहा, “आज मुझे बड़ी खुशी है कि मैं किसी के काम आ सका। रक्तदान करके मुझे जो सुकून मिला है, वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। हमें एक-दूसरे की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।”

अस्पताल में हुई सराहना……एक (एडवोकेट) द्वारा पेश की गई इस संवेदनशीलता की अस्पताल प्रशासन और मरीज के परिजनों ने सराहना की है। परिजनों का कहना है कि इंद्राज उनके लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं थे, जिन्होंने ऐन वक्त पर आकर उनकी हताशा को उम्मीद में बदल दिया।

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