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दिल्ली समिट में प्रदर्शित गल्गोटिया विश्वविद्यालय के अत्याधुनिक रोवर की खरीद अब विवादों में है,

गल्गोटिया यूनिवर्सिटी 'रोवर' महा-खुलासा

ग्रेटर नोएडा/ दिल्ली:–  गलगोटिया यूनिवर्सिटी (ग्रेटर नोएडा) का मामला दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ से जुड़ा है, जहां यूनिवर्सिटी ने चीन की कंपनी Unitree का ‘Unitree Go2’ रोबोट डॉग अपने स्टॉल पर “ओरियन” नाम से स्वदेशी इनोवेशन के रूप में पेश किया था। यह दावा गलत पाए जाने पर यूनिवर्सिटी विवादों में घिर गई

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क्या शिक्षा के नाम पर ‘ड्रैगन’ की तकनीक को भारत में पिछले दरवाजे से एंट्री दी जा रही है? दिल्ली के हाई-प्रोफाइल समिट में गल्गोटिया यूनिवर्सिटी ने जिस रोवर को ‘भविष्य’ बताकर पेश किया, अब उसी रोवर ने यूनिवर्सिटी और शिक्षा विभाग के लिए ‘मुसीबत’ खड़ी कर दी है!”

दावा था कि ये रोवर छात्रों को मंगल और चांद की सैर कराएगा, लेकिन जांच में पता चला है कि इस रोवर की जड़ें सरहद पार चीन से जुड़ी हैं!

मीडिया की पड़ताल में बड़ा खुलासा हुआ है कि इस करोड़ों की खरीद में ‘मेक इन इंडिया’ के नियमों को कूड़ेदान में फेंक दिया गया।”

हैरानी की बात देखिए! एक तरफ शिक्षा विभाग का बजट सरकारी स्कूलों में पीने के पानी और छत के लिए कम पड़ जाता है, वहीं दूसरी तरफ निजी यूनिवर्सिटी खुलेआम करोड़ों के विदेशी रोबोट का प्रदर्शन कर रही हैं। सवाल ये है कि क्या शिक्षा विभाग सो रहा है? या फिर जानबूझकर अपनी आंखें मूंद ली हैं?”

अब जरा इन नियमों पर गौर कीजिए। GFR 2017 कहता है कि ₹2.5 लाख से ऊपर की विदेशी खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर चाहिए— क्या टेंडर हुआ? नहीं!

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— क्या दी गई? नहीं! डेटा प्राइवेसी का क्या? सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस रोवर का रिमोट कंट्रोल और डेटा सर्वर चीन में हो सकता है। क्या ये राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं है?”

यूनिवर्सिटी प्रशासन कहता है कि ये सब ‘एजुकेशनल पर्पस’ के लिए है। लेकिन क्या शिक्षा के नाम पर नियमों की धज्जियां उड़ाने की छूट मिलनी चाहिए? जब एक आम आदमी टैक्स में एक रुपया कम देता है तो विभाग डंडा लेकर पहुंच जाता है, फिर इस करोड़ों की ‘चीनी डील’ पर चुप्पी क्यों

“सच तो ये है कि ये रोवर छात्रों के भविष्य के लिए कम और यूनिवर्सिटी की ‘मार्केटिंग’ के लिए ज्यादा खरीदा गया लगता है। शिक्षा विभाग को अब जागना होगा और इस पूरी खरीद की उच्च-स्तरीय जांच करानी होगी। वरना याद रखिए, अगर नीयत में खोट हो, तो तकनीक भी तरक्की नहीं, बर्बादी लाती है।”

आप क्या सोचते हैं? क्या गल्गोटिया यूनिवर्सिटी को अपने दस्तावेज सार्वजनिक नहीं करने चाहिए? हमें कमेंट सेक्शन में बताएं। देखते रहिए संविधान समाचार न्यूज़

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