स्मार्ट मीटर रद्द करो, स्कूल बंदी रोको – SUCI (C) का प्रशासन को अल्टीमेटम
अशोकनगर में जनआक्रोश: स्मार्ट मीटर और स्कूल बंदी के विरोध में धरना

- प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना रद्द करने, सरकारी स्कूल बंदी के विरोध और स्वच्छ पानी की मांग को लेकर SUCI (C) का कलेक्ट्रेट पर धरना
संविधान समाचार न्यूज:-
अशोकनगर। मेहनतकश वर्ग की क्रांतिकारी पार्टी SUCI (C) द्वारा जिला कलेक्ट्रेट के सामने प्रीपेड स्मार्ट मीटर, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा महिलाओं-बच्चियों पर बढ़ते अपराधों जैसे जन मुद्दों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के पश्चात मुख्यमंत्री के नाम 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया।
धरने को संबोधित करते हुए पार्टी के जिला सचिव सचिन जैन ने कहा कि आज गरीब और मध्यम वर्ग के लिए जीवनयापन दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। रोजगार का संकट गहराता जा रहा है, वहीं दैनिक उपयोग की वस्तुएं और आवश्यक सेवाएं महंगी होती जा रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और बिजली जैसे बुनियादी सेवा क्षेत्रों को कॉर्पोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है।
उन्होंने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि स्वच्छता में अग्रणी बताए जाने वाले प्रदेश में भी नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। अशोकनगर की अनेक कॉलोनियों में भी पेयजल संकट बना हुआ है, लेकिन प्रशासन समाधान के प्रति गंभीर नहीं है।
बिजली के निजीकरण की नीति की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर के माध्यम से उपभोक्ताओं को भारी बिल थमाए जा रहे हैं तथा लोगों को भ्रमित या दबाव बनाकर मीटर लगाए जा रहे हैं। 
सरकारी स्कूलों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में 94,000 सरकारी स्कूल बंद करने की नीति लाई गई है। क्लोजर एवं मर्जर के तहत 20,000 से अधिक स्कूल बंद हो चुके हैं। अशोकनगर, महिदपुर और पिपरई में संचालित सांदीपनी स्कूलों के नाम पर आसपास के सरकारी स्कूलों को मर्ज कर बंद किया जा रहा है। इससे छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा।
आगे वक्तव्य देते हुए कृष्णा बैरागी ने कहा कि सौंदर्यीकरण के नाम पर मकान-दुकानों को तोड़ा जा रहा है। शहर की सड़कों पर धूल और गड्ढों के कारण दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी से मरीजों को पर्याप्त उपचार नहीं मिल पा रहा है। यदि समस्याओं का समाधान शीघ्र नहीं किया गया तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। 
धरने के उपरांत प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
1. सभी नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए। भागीरथपुरा सहित दूषित पानी से हुई मौतों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित किया जाए तथा पीड़ितों को मुफ्त इलाज व पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
2. प्रीपेड स्मार्ट मीटर की RDSS योजना तत्काल रद्द की जाए, बिजली का निजीकरण वापस लिया जाए और बढ़े हुए बिल माफ किए जाएं।
3. 94,000 सरकारी स्कूलों को बंद करने की नीति निरस्त की जाए।
4. स्वास्थ्य क्षेत्र में PPP नीति समाप्त कर सभी को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
5. महिलाओं-बच्चियों पर बढ़ते अपराध, अपहरण, शराब-नशा व अश्लील प्रचार पर रोक लगाई जाए।
6. कॉर्पोरेट मुनाफे हेतु पर्यावरण, जल-जंगल-जमीन का दोहन बंद किया जाए; आदिवासियों का विस्थापन रोका जाए।
7. विकास/सौंदर्यीकरण के नाम पर बस्तियों को उजाड़ना बंद किया जाए।
8. कृषि उपज पर लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य सुनिश्चित कर सरकारी खरीद की गारंटी दी जाए; किसानों को खाद-बीज-बिजली सस्ती दर पर मिले।
9. चारों लेबर कोड रद्द कर श्रमिक हितैषी कानून बहाल किए जाएं।
10. सभी युवाओं को स्थायी रोजगार दिया जाए तथा रोजगार न मिलने तक भत्ता सुनिश्चित किया जाए।
