आजादी के 77 साल बाद पहली बार दलित घोड़ी पर चढ़ा दूल्हा, पुलिस के साये में निकली बारात
दमोह जिले के ग्राम कुआं खेड़ा में रचा गया इतिहास:

Damoh:- मध्य प्रदेश के दमोह जिले की पटेरा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुआं खेड़ा में एक ऐसी ऐतिहासिक बारात निकली, जिसने सदियों पुरानी सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर समानता की एक नई इबारत लिख दी है। बंसल परिवार के इस विवाह समारोह ने न केवल गांव में बल्कि पूरे जिले में चर्चा बटोरी, क्योंकि आजादी के 77 वर्ष बीत जाने के बाद यहां पहली बार किसी दलित परिवार के दूल्हे ने घोड़ी पर बैठकर अपनी बारात निकाली।
पुलिस छावनी में तब्दील हुआ कुआं खेड़ा
बारात के दौरान किसी भी व्यवधान की आशंका को देखते हुए बंसल परिवार ने पहले ही पुलिस प्रशासन को आवेदन देकर सुरक्षा की मांग की थी।
प्रशासन ने भी मुस्तैदी दिखाते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया। पटेरा पुलिस सहित जिले के अन्य पुलिसकर्मी पूरी बारात के दौरान साये की तरह साथ रहे। समस्त पुलिसकर्मियों की कड़ी निगरानी में यह ‘विजय यात्रा’ गांव की गलियों से गुजरी, जिसे देखने के लिए ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा।
हाथ में ‘संविधान’ और दिल में ‘स्वाभिमान’
बारात का सबसे प्रभावशाली दृश्य तब दिखा जब दूल्हा हाथ में भारत के संविधान की प्रति लेकर घोड़ी पर सवार हुआ। दूल्हे का यह अंदाज साफ बता रहा था कि उसे यह हिम्मत और बराबरी का अधिकार बाबा साहेब के संविधान से मिला है। 77 साल के लंबे इंतजार के बाद मिली इस खुशी और सम्मान को देखकर परिवार की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए।

सामाजिक बदलाव का शंखनाद
ग्राम कुआं खेड़ा में हुई इस पहल को सामाजिक चेतना के रूप में देखा जा रहा है। बंसल परिवार ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए प्रशासन के सहयोग से यह साबित कर दिया कि आज के दौर में अधिकार सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि हकीकत में भी हैं।
खबर के खास आकर्षण:
* स्थान: ग्राम कुआं खेड़ा, तहसील पटेरा, जिला दमोह।
* ऐतिहासिक क्षण: आजादी के बाद पहली बार गांव में निकली ऐसी बारात।
* प्रशासनिक सहयोग: पुलिस बल की मौजूदगी ने सुनिश्चित किया दूल्हे का सम्मान।
* युवा संदेश: हाथ में संविधान लेकर दूल्हे ने समाज को दिया जागरूकता का संदेश।
