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APPHF इंडिया का सफल आयोजन: “ZAIRA” पुस्तक ने जगाई नई सोच

APPHF इंडिया के आयोजन में देश-विदेश के विद्वानों की सहभागिता, साहित्य को संवाद और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बताया

 

📍 भोपाल | 28 मार्च 2026

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर साहित्यिक ऊर्जा और बौद्धिक संवाद का केंद्र बना, जब आशा पारस फॉर पीस एंड हारमनी फाउंडेशन (APPHF) इंडिया द्वारा “ZAIRA: Self and Space” पुस्तक का भव्य लोकार्पण एवं विचार-विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह गरिमामय आयोजन शिवाजी नगर स्थित दुष्यंत कुमार पांडुलिपि संग्रहालय में सायं 4:00 बजे से प्रारंभ हुआ, जिसमें देश-विदेश के शिक्षाविद, साहित्यकार, शोधकर्ता और युवा प्रतिभाएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. आशा शुक्ला ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में साहित्य की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि “ऐसे साहित्यिक आयोजन समाज में संवाद, संवेदनशीलता और जागरूकता को नई दिशा देते हैं। साहित्य केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज को समझने और बदलने का माध्यम है।”

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. वीणा सिन्हा ने अपने वक्तव्य में पुस्तकों की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं होतीं, बल्कि वे समाज को जोड़ने, विचारों को साझा करने और नई सोच को जन्म देने का सशक्त माध्यम भी हैं।”

कार्यक्रम की शुरुआत कनीज़ ज़हरा रज़ावी के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने आयोजन के उद्देश्य और पुस्तक की वैचारिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। इसके बाद पुस्तक पर केंद्रित एक विस्तृत अकादमिक चर्चा आयोजित की गई, जिसमें तीन प्रमुख वैचारिक सहयोगियों—डॉ. दीप्ति यादव, आयुषी पराशर और एम. अंज़र—ने अपने शोधपरक विचार प्रस्तुत किए।

वक्ताओं ने “ZAIRA: Self and Space” की विषयवस्तु का गहन विश्लेषण करते हुए इसे समकालीन समाज, व्यक्तिगत पहचान (Self) और सामाजिक स्पेस (Space) के बीच संबंधों को समझने वाली एक महत्वपूर्ण कृति बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और दार्शनिक विमर्श का संगम है, जो पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है।

कार्यक्रम के दौरान पुस्तक का विधिवत लोकार्पण किया गया, जिसे उपस्थित अतिथियों और दर्शकों ने उत्साहपूर्वक सराहा। चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि इस प्रकार के आयोजन साहित्य और समाज के बीच सेतु का कार्य करते हैं तथा नई पीढ़ी को विचारशील और जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस अवसर पर फाउंडेशन द्वारा ZAIRA उपन्यास की लेखिका प्रो. विनीता भटनागर का सार्वजनिक सम्मान भी किया गया। उन्हें साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए विशेष रूप से सराहा गया।

कार्यक्रम का सफल संचालन एवं समन्वयन लव चावड़ीकर (एग्जीक्यूटिव मैनेजर, APPHF इंडिया) द्वारा किया गया, जबकि अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. आर के शुक्ला ने प्रस्तुत किया।

इस आयोजन में सैकड़ों प्रतिभागियों की उपस्थिति रही, जिनमें युवा साहित्यकार, लेखक, समाजसेवी, शिक्षाविद एवं मीडिया प्रतिनिधि शामिल थे। कार्यक्रम ने न केवल साहित्यिक संवाद को बढ़ावा दिया, बBhopalल्कि समाज में विचारों के आदान-प्रदान और बौद्धिक जागरूकता को भी नई गति प्रदान की।

👉 कुल मिलाकर, यह आयोजन साहित्य, समाज और संवेदनाओं के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा, जिसने यह सिद्ध किया कि पुस्तकें आज भी समाज को दिशा देने की क्षमता रखती हैं।

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