MP चयन मंडल का ‘अजूबा’: वन विभाग भर्ती में SC वर्ग के लिए 0 पद, क्या कागजों से गायब हो गया 16% आरक्षण..?
सिस्टम की बड़ी 'चूक' या 'चाल'?: संवैधानिक अधिकार 16% और भर्ती में हिस्सेदारी 0%, अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश।

भोपाल | विशेष संवाददाता…….
मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) की ताज़ा वन विभाग भर्ती ने एक नया संवैधानिक विवाद खड़ा कर दिया है। प्रदेश में अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए 16% आरक्षण का नियम लागू है, लेकिन वन रक्षक के 728 पदों के विज्ञापन में इस वर्ग के लिए पदों की संख्या ’00’ (शून्य) दर्शाई गई है। सवाल यह है कि क्या भर्ती के रोस्टर से एक पूरे वर्ग का हक ही ‘डिलीट’ कर दिया गया है?
रिपोर्ट: गणित जो समझ से परे है………….नियमों के मुताबिक, अगर 728 पदों पर भर्ती निकलती है, तो 16% आरक्षण के लिहाज से कम से कम 116 पद SC वर्ग के हिस्से आने चाहिए थे। लेकिन नोटिफिकेशन के कॉलम में ‘शून्य’ देखकर अभ्यर्थी हैरान हैं।
दावा: विभाग कह रहा है कि रोस्टर का पालन हुआ है।
हकीकत: अगर पद शून्य हैं, तो इसका मतलब है कि या तो विभाग में इस वर्ग के कर्मचारी पहले से ही संख्या से अधिक हैं (जो असंभव सा लगता है), या फिर बैकलॉग पदों की गणना में भारी हेरफेर हुई है।
3 तीखे सवाल: जवाब कौन देगा?….संविधान बनाम सिस्टम: जब 16% आरक्षण संवैधानिक गारंटी है, तो विज्ञापन में इसे ‘जीरो’ करने का साहस किसने किया?
रोस्टर का रहस्य: क्या चयन मंडल ने विज्ञापन जारी करने से पहले रोस्टर रजिस्टर की जांच की थी? या केवल पुराने डेटा को कॉपी-पेस्ट कर दिया गया?
युवाओं का भविष्य: सालों से तैयारी कर रहे SC वर्ग के हजारों युवाओं के पास अब इस भर्ती में आवेदन करने का क्या विकल्प बचा है? क्या उन्हें ‘सामान्य’ श्रेणी में धकेला जा रहा है?
एक्सपर्ट व्यू: “यह नियमों की खुली अनदेखी”
संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़ी भर्ती में एक पूरे आरक्षित वर्ग को शून्य कर देना सीधे तौर पर आरक्षण अधिनियम 1994 का उल्लंघन है। यदि बैकलॉग पद नहीं थे, तो भी ‘फ्रेश वैकेंसी’ में आनुपातिक पद देना अनिवार्य है।
“यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय पर प्रहार है। सरकार को तुरंत शुद्धि-पत्र जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।”
— (संविधान समाचार ब्यूरो)


