जिंदा इंसान का पोस्टमार्टम करने की तैयारी में था गुना जिला अस्पताल; मर्चुरी की मेज पर खुली युवक की आंखें।
जिंदा को मुर्दा बनाने वाली रिपोर्ट: अगर 5 मिनट की देरी होती, तो डॉक्टर कर देते जिंदा इंसान का पोस्टमार्टम।

गुना जिला अस्पताल की बड़ी लापरवाही: ‘मुर्दा’ जिंदा होकर मर्चुरी से भागा, नग्न हालत में युवक को दौड़ते देख उड़े लोगों के होश
मौत को मात: 20 साल के युवक ने सल्फास खाया था, डॉक्टरों ने मृत घोषित कर मर्चुरी भेजा; चीरा लगने से पहले लौट आईं सांसें
गुना | विशेष संवाददाता
गुना जिला अस्पताल में सोमवार को एक ऐसी घटना घटी जिसने चिकित्सा विज्ञान और अस्पताल प्रबंधन दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिसे डॉक्टरों ने ‘मृत’ घोषित कर पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी (शव गृह) भेज दिया था, वह युवक अचानक जिंदा होकर खड़ा हो गया। युवक को मर्चुरी से नग्न और बदहवास हालत में बाहर की ओर भागते देख अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे, उन्हें लगा कि उन्होंने कोई ‘साया’ देख लिया है।
📍 घटनाक्रम: 11 मार्च की वो खौफनाक दास्तां
जानकारी के अनुसार, एक 20 वर्षीय युवक ने मानसिक तनाव के चलते सल्फास का सेवन कर लिया था। उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। बिना किसी गहन परीक्षण या ईसीजी (ECG) के ही औपचारिकताएं पूरी की गईं और शव को पोस्टमार्टम के लिए ‘पीएम हाउस’ शिफ्ट कर दिया गया।
😱 मर्चुरी में चमत्कार: जब ‘लाश’ खुद उठ खड़ी हुई
युवक को मर्चुरी की ठंडी मेज पर पोस्टमार्टम के लिए निर्वस्त्र लिटाया गया था। डॉक्टर और स्टाफ चीर-फाड़ की तैयारी शुरू करने ही वाले थे कि अचानक युवक के शरीर में हलचल हुई। युवक को होश आया तो उसने खुद को लाशों के बीच और डरावने माहौल में पाया। घबराहट में वह उसी नग्न अवस्था में बाहर की ओर भागा। उसे देख मरीजों और तीमारदारों में चीख-पुकार मच गई।
⚠️ संविधान समाचार के 3 सवाल:
बिना पल्स चेक किए ‘डेथ सर्टिफिकेट’ कैसे? क्या डॉक्टरों ने सिर्फ अंदाजे से युवक को मृत मान लिया था?
जिंदा इंसान का पोस्टमार्टम हो जाता तो? अगर डॉक्टर चीरा लगा देते, तो इस ‘मेडिकल मर्डर’ की जिम्मेदारी किसकी होती?
प्रबंधन की चुप्पी क्यों? घटना के बाद भी अब तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
“यह कुदरत का करिश्मा और उस युवक की किस्मत थी कि उसे समय पर होश आ गया, वरना सिस्टम ने तो उसे जिंदा ही दफनाने की तैयारी कर ली थी।”
तारीख: 11 मार्च
कारण: सल्फास का सेवन (मानसिक तनाव)
डॉक्टरों का फैसला: मृत घोषित कर मर्चुरी भेजा
हैरानी की बात: युवक मर्चुरी से नग्न अवस्था में जान बचाकर भागा
[संविधान समाचार विशेष]: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है। डॉक्टरों की यह लापरवाही सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है। अस्पताल प्रशासन को इस ‘जिंदा मौत’ के खेल पर जवाब देना होगा।

