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सरकारी ‘इवेंट’ की बलि चढ़ी जनता: CM के सम्मेलन से लौट रहे 10 ‘हितग्राहियों’ की दर्दनाक मौत !

"CM कार्यक्रम के बाद मौत का मंजर! बस पलटी, 10 की गई जान — दर्दनाक तस्वीरें सामने"

भीड़ जुटाने की होड़ में सुरक्षा हाशिए पर; छिंदवाड़ा में सड़क पर बिखरा ‘हितग्राहियों’ का खून, 30 से ज्यादा घायल

संविधान समाचार | छिंदवाड़ा

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में गुरुवार की शाम एक वीभत्स मंजर की गवाह बनी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘हितग्राही सम्मेलन’ में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने आए मासूम और महिलाएं जब घर लौट रहे थे, तब उन्हें क्या पता था कि रास्ते में मौत उनका इंतजार कर रही है। सिमरिया के पास बस और पिकअप की आमने-सामने की टक्कर में 10 लोगों ने दम तोड़ दिया। हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक महिला और एक बच्चे का हाथ कटकर धड़ से अलग हो गया।

सवाल: क्या इवेंट की कामयाबी जनता की जान से बड़ी है?

​सरकारी आयोजनों में भीड़ जुटाने के लिए बसों को ठूस-ठूस कर भरने की परंपरा नई नहीं है, लेकिन छिंदवाड़ा हादसे ने सीधे मुख्यमंत्री की व्यवस्था पर निशाना साधा है।

  • लापरवाही का रूट: आखिर शाम 6:30 बजे जब यह हादसा हुआ, तब रूट पर ट्रैफिक और सुरक्षा के इंतजाम क्या थे?
  • खस्ताहाल बसें: क्या सम्मेलन के लिए लगाई गई MP28 P 0321 नंबर की बस फिटनेस मानकों पर खरी थी?
  • जिम्मेदार कौन?: तालियां बटोरने वाले नेता क्या उन परिवारों की भरपाई कर पाएंगे जिनके चिराग इस ‘इवेंटबाजी’ की भेंट चढ़ गए?

अपनों को खोने का दर्द: ये थे वो ‘हितग्राही’ जो घर नहीं लौटे

​अस्पताल के गलियारों में गूंजती चीखें प्रशासन की विफलता की कहानी बयां कर रही हैं। मृतकों की सूची में 7 साल का मासूम वंश भी शामिल है, जिसकी जिंदगी शुरू होने से पहले ही सिस्टम की भेंट चढ़ गई। अन्य मृतकों में भागवती, दौलत, शकुन यादव, रामदास, रमेश और सिया बाई जैसे नाम शामिल हैं, जो केवल सरकारी आंकड़ों के लिए एक संख्या बनकर रह गए हैं।

मरहम या खानापूर्ति?

​हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने हमेशा की तरह मुआवजे का मरहम लगाया है।

    • मृतक: 4-4 लाख रुपये।
    • गंभीर घायल: 1-1 लाख रुपये। बड़ा सवाल: क्या 4 लाख रुपये में उस मां की ममता या उस बच्चे का भविष्य वापस आएगा जिसका हाथ इस सिस्टम की लापरवाही ने काट दिया?

“ग्रीन कॉरिडोर बनाकर घायलों को लाया गया, लेकिन अस्पताल की बदहाली और नागपुर रेफर करने की मजबूरी बताती है कि छिंदवाड़ा का स्वास्थ्य ढांचा आज भी कितना कमजोर है।” > — एक चश्मदीद का बयान

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