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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राजस्थान के स्कूलों में अब अनिवार्य होगी राजस्थानी भाषा; 12 मई का दिन इतिहास में दर्ज

नई दिल्ली/जयपुर: राजस्थान की माटी और उसकी भाषा के लिए 12 मई 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राजस्थान सरकार को निर्देशित किया है कि राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को एक विषय के रूप में अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ का आदेश

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करना बच्चों का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार की उदासीनता बच्चों को उनकी मातृभाषा में सीखने से वंचित नहीं कर सकती।

फैसले की 5 बड़ी बातें (12 मई 2026):

अनिवार्य विषय: अब राजस्थान के हर स्कूल (सरकारी और निजी) में राजस्थानी को एक अनिवार्य विषय (Subject) के रूप में पढ़ाया जाएगा।

NEP 2020 का हवाला: न्यायालय ने ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ के संदर्भ में राज्य सरकार को राजस्थानी भाषा को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक नीति बनाने का आदेश दिया है।

शिक्षा का माध्यम: कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इसे सिर्फ एक विषय तक सीमित न रखकर, चरणबद्ध तरीके से ‘शिक्षा के माध्यम’ (Medium of Instruction) के रूप में भी शामिल किया जाए।

डेडलाइन: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से इस ऐतिहासिक आदेश पर की गई कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट सितंबर 2026 तक मांगी है।

सांस्कृतिक अस्मिता: कोर्ट ने माना कि राजस्थानी भाषा राजस्थान की संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास की आत्मा है।

मातृभाषा से बढ़ेगा बच्चों का आत्मविश्वास

इस निर्णय से न केवल मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी, हाड़ौती, मेवाती, बृज, वागड़ी, मालवी और शेखावाटी जैसी समृद्ध बोलियों को संरक्षण मिलेगा, बल्कि प्रदेश के बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। जब बच्चे अपनी जड़ों की भाषा में पढ़ेंगे, तो वे अपनी संस्कृति और लोक मूल्यों से अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ पाएंगे।

8वीं अनुसूची की मांग हुई और तेज

उच्चतम न्यायालय के इस कड़े रुख के बाद अब केंद्र सरकार पर भी दबाव बढ़ गया है। राजस्थान के बुद्धिजीवियों और आम जनता का कहना है कि अब केंद्र को बिना देरी किए राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कर प्रदेशवासियों की वर्षों पुरानी मुराद पूरी करनी चाहिए।

“यह केवल भाषा की जीत नहीं, बल्कि राजस्थान की आत्मा को जीवित रखने का संकल्प है।”

  • ब्यूरो रिपोर्ट: संविधान समाचार
  • दिनांक: 13 मई 2026
  • जै राजस्थान, जै राजस्थानी!

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