अशोकनगर में सरकारी स्कूलों के विलय के विरोध में संघर्ष तेज, स्कूल बचाओ संघर्ष समिति ने सौंपा ज्ञापन
सीएम राइज (सांदीपनी) स्कूल में मर्ज कर विद्यालय बंद करने के फैसले पर रोक लगाने की मांग

अशोकनगर | संविधान समाचार न्यूज़
मध्य प्रदेश के अशोकनगर में शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 2 सहित आसपास के अन्य सरकारी विद्यालयों को सीएम राइज (सांदीपनी) स्कूल में मर्ज कर बंद किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ जनआक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को स्कूल बचाओ संघर्ष समिति ने जिला कलेक्टर के नाम अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इस निर्णय पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
स्कूल बचाओ संघर्ष समिति के जिला संयोजक देवेंद्र विजौरे ने कहा कि शिक्षा किसी भी सभ्य समाज की रीढ़ होती है। स्वतंत्रता आंदोलन के बाद सरकारी विद्यालयों की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि हर बच्चे को उसके घर के समीप शिक्षा उपलब्ध हो सके। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत यह व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी कि यदि बच्चा स्कूल तक नहीं पहुंच सकता, तो स्कूल बच्चे तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इसी नीति के तहत 1 किलोमीटर पर प्राथमिक विद्यालय, 3 किलोमीटर पर माध्यमिक विद्यालय और 5 किलोमीटर पर हाई स्कूल खोले गए थे। लेकिन नई शिक्षा नीति 2020 तथा क्लोजर-मर्जर नीति के नाम पर अब इन नियमों की अनदेखी करते हुए अनेक विद्यालयों को बंद किया जा रहा है।
14 विद्यालय बंद करने की तैयारी, 5000 से अधिक छात्र प्रभावित
समिति के अनुसार अशोकनगर शहर और आसपास के लगभग 14 सरकारी विद्यालयों को बंद करने या सीएम राइज स्कूलों में विलय करने की प्रक्रिया चल रही है। इनमें करीब 5000 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
विशेष रूप से शशिधर राणा चौराहा स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 2 में लगभग 800 विद्यार्थी पढ़ते हैं, जिनमें बड़ी संख्या मजदूरों और किसानों के बच्चों की है। यदि इस विद्यालय को बंद कर सीएम राइज सांदीपनी स्कूल में स्थानांतरित किया जाता है, तो विद्यार्थियों को लगभग 9 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा।
समिति ने आशंका जताई कि इतनी दूरी, बढ़ती आपराधिक घटनाओं और असुरक्षित वातावरण के कारण छोटे बच्चों, विशेषकर छात्राओं के लिए नियमित रूप से स्कूल पहुंचना बेहद कठिन होगा।
पहले बंद किए गए स्कूलों के छात्र पढ़ाई छोड़ने को मजबूर
ज्ञापन में बताया गया कि शंकरपुर टोरिया स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय पहले ही बंद किया जा चुका है। वहां छात्र संख्या 135 थी और विद्यालय बंद होने के बाद अनेक बच्चे पढ़ाई छोड़ने को विवश हो गए हैं।
इसी प्रकार मोहरी गांव का माध्यमिक विद्यालय, शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय अशोकनगर, हाई स्कूल भौंराकाछी सहित कई अन्य विद्यालय भी बंद करने की सूची में शामिल हैं।
“बेटी पढ़ाओ” के नारे और जमीनी हकीकत में विरोधाभास
समिति ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे नारे दिए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर छात्राओं को घर से दूर स्कूल जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इससे बालिकाओं की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
समिति ने यह भी कहा कि जहां एक ओर शराब दुकानों का विस्तार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा संस्थानों को बंद किया जा रहा है। ऐसे में समाज को यह तय करना होगा कि प्राथमिकता शिक्षा को दी जाए या नशे को।
महापुरुषों के संघर्ष का हवाला
देवेंद्र विजौरे ने कहा कि Savitribai Phule, Fatima Sheikh, Jyotirao Phule और Ishwar Chandra Vidyasagar जैसे महापुरुषों ने सार्वजनिक शिक्षा के प्रसार के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किए थे। आज सरकारी विद्यालयों को बंद करना उनकी विचारधारा और शिक्षा के अधिकार की भावना के विपरीत है।
प्रशासन ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद अपर कलेक्टर ने समिति को आश्वस्त किया कि मांगों को राज्य सरकार तक पहुंचाया जाएगा तथा जिला प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले विषयों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

ज्ञापन का वाचन हरिसिंह राजौरिया ने किया।
जनांदोलन के लिए जनता से अपील
स्कूल बचाओ संघर्ष समिति ने जिले के नागरिकों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और विद्यार्थियों से सरकारी स्कूलों को बचाने के लिए एकजुट होकर जनआंदोलन में भाग लेने की अपील की है।

