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बड़ी खबर: लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक खारिज, 850 सीटों का प्रस्ताव गिरा |

850 सीटों का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में, परिसीमन और महिला आरक्षण पर ब्रेक

📍 नई दिल्ली | 17 अप्रैल 2026

भारतीय संसदीय इतिहास में शुक्रवार का दिन बेहद नाटकीय रहा, जब केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका और खारिज हो गया। इस फैसले के साथ ही देश में लोकसभा सीटों के परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़ी बड़ी योजनाओं पर फिलहाल विराम लग गया है।

📌 क्या था इस विधेयक का मकसद?

सरकार इस संशोधन के जरिए देश की लोकतांत्रिक संरचना में व्यापक बदलाव करना चाहती थी। इसके प्रमुख प्रस्ताव थे:

लोकसभा सीटों में बड़ा विस्तार:

वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर अधिकतम 850 सीटें करने का प्रस्ताव।

नया परिसीमन (Delimitation):

2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का नए सिरे से बंटवारा।

महिला आरक्षण लागू करना:

2029 के आम चुनाव से लोकसभा में 33% महिला आरक्षण लागू करने की योजना।

🏛️ सदन में क्या रहा गणित?

संविधान संशोधन पारित करने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है।

कुल उपस्थित सदस्य: 528

पक्ष में वोट: 298

विरोध में वोट: 230

जरूरी बहुमत: लगभग 352 वोट

बहुमत का आंकड़ा हासिल न होने पर स्पीकर ने विधेयक के खारिज होने की घोषणा कर दी।

⚖️ विपक्ष ने क्यों किया विरोध?

विपक्षी दलों ने कई अहम मुद्दों को लेकर इस बिल का कड़ा विरोध किया:

1. दक्षिण भारत की चिंता

तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों का तर्क था कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद उनकी सीटें घट सकती हैं, जिससे प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा।

2. OBC सब-कोटा की मांग

महिला आरक्षण के भीतर पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग कोटा तय करने की मांग पूरी नहीं होने पर विपक्ष ने विरोध तेज किया।

3. संघीय ढांचे पर सवाल

विपक्ष का आरोप था कि प्रस्तावित सीट वितरण देश के संघीय संतुलन को बिगाड़ सकता है और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।

सरकार ने तुरंत उठाया बड़ा कदम

विधेयक गिरने के तुरंत बाद सरकार ने दबाव में आकर दो अन्य महत्वपूर्ण बिल भी वापस ले लिए:

परिसीमन विधेयक, 2026

संघ राज्यक्षेत्र संशोधन विधेयक, 2026

📊 क्या हैं इसके राजनीतिक मायने?

इस विधेयक के खारिज होने से साफ है कि बड़े संवैधानिक बदलावों के लिए सर्वसम्मति और व्यापक राजनीतिक समर्थन बेहद जरूरी है।

2029 में प्रस्तावित महिला आरक्षण की टाइमलाइन पर असर पड़ सकता है

परिसीमन की प्रक्रिया अब और आगे खिसक सकती है

केंद्र और राज्यों के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना

📝 निष्कर्ष

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक का खारिज होना भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। यह घटना दिखाती है कि लोकतंत्र में केवल संख्या नहीं, बल्कि सहमति और संतुलन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

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