
गाजियाबाद/लखनऊ। संविधान समाचार
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने संगठन के भीतर सख्त अनुशासन का संदेश देते हुए अपने कद्दावर नेता और हाल ही में केरल राज्य के प्रभारी नियुक्त किए गए जयप्रकाश सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। जिला इकाई द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में सिंह पर ‘अनुशासनहीनता’ और ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ में संलिप्त होने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
जिम्मेदारी और निष्कासन के बीच का नाटकीय मोड़
जयप्रकाश सिंह का निष्कासन राजनीतिक हलकों में इसलिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि कुछ समय पहले ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें केरल राज्य की कमान सौंपी थी। दक्षिण भारत में पार्टी के विस्तार के लिए उन्हें अहम कड़ी माना जा रहा था। हालांकि, प्रभार मिलने के कुछ ही समय बाद उनके खिलाफ हुई इस कार्रवाई ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान को सतह पर ला दिया है।
8 साल का वनवास और माफीनामा
खबर की पृष्ठभूमि काफी भावुक और उतार-चढ़ाव भरी रही है। जयप्रकाश सिंह बसपा के उन पुराने चेहरों में शामिल थे जिन्होंने पूर्व में पार्टी से निष्कासन के दौरान 8 वर्षों तक बिना किसी पद के निष्ठापूर्वक कार्य किया। कई बार शीर्ष नेतृत्व और मायावती से माफी मांगने के बाद उन्हें दोबारा पार्टी की मुख्यधारा में शामिल किया गया था। लेकिन जिला कार्यालय की मानें तो, “व्यवहार में सुधार न आने और स्वार्थी आचरण के कारण” उन्हें पुनः बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
निष्काशित आदेश के कड़े शब्द और कार्यकर्ताओं को चेतावनी
बसपा जिला अध्यक्ष ने आधिकारिक बयान जारी कर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दी है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि:
“जयप्रकाश सिंह जैसे अवसरवादी लोगों से पार्टी कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत है। संगठन में अनुशासन से ऊपर कोई व्यक्ति नहीं है। पार्टी विरोधी आचरण किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा।”
राजनीतिक समीकरणों पर असर
गाजियाबाद से लेकर लखनऊ तक इस निष्कासन के बाद दिग्गज बसपा नेताओं की प्रतिक्रियाएं आना शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयप्रकाश सिंह जैसे अनुभवी नेता को खोना, विशेषकर चुनाव के मुहाने पर, पार्टी के लिए जोखिम भरा हो सकता है। अब सबकी निगाहें जयप्रकाश सिंह के अगले कदम पर टिकी हैं— क्या वह फिर से माफी की राह चुनेंगे या किसी नए राजनीतिक ठिकाने की तलाश करेंगे?
पद: पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं नवनियुक्त केरल राज्य प्रभारी।
कारण: अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप।
इतिहास: 8 साल के निष्कासन के बाद हाल ही में हुई थी वापसी।
प्रभाव: पश्चिमी उत्तर प्रदेश और केरल के संगठन ढां
चे पर बड़ा असर।

