*सड़कों पर बह रहा मवेशियों और इंसानों का खून, सोया है प्रशासन! 8 सितंबर को
मऊगंज-सीधी सीमा (पिपराही तिराहे) पर समाजवादी पार्टी का ऐतिहासिक चक्का जाम!

संवाददाता – रावेंद्र कुमार तिवारी
मऊगंज क्षेत्र में आवारा पशुओं के कारण मरे आम नागरिकों और तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे मवेशियों के खून का हिसाब मांगने के लिए समाजवादी पार्टी आगामी 8 सितंबर 2026 को सुबह 10:00 बजे मऊगंज जिले के हनुमना ब्लॉक एवं सीधी जिले के सीमावर्ती ग्राम पंचायत पिपराही तिराहे पर विशाल चक्का जाम आंदोलन करने जा रही है।यह आंदोलन समाजवादी पार्टी मऊगंज के जिलाध्यक्ष एडवोकेट अनूप यादव एवं समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय सचिव व मऊगंज प्रभारी राकेश सिंह यादव के नेतृत्व में आर-पार की लड़ाई के रूप में लड़ा जाएगा।
24 अक्टूबर 2025 के कलेक्ट्रेट घेराव के बाद भी प्रशासन की खूनी चुप्पी:
सपा नेताओं ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज से ठीक एक साल पहले 24 अक्टूबर 2025 को कलेक्ट्रेट का ऐतिहासिक घेराव कर प्रशासन को इन सभी जानलेवा समस्याओं से अवगत कराया गया था। लेकिन प्रशासन की लापरवाही के कारण आज स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। अब जनता चुप नहीं बैठेगी।
आंदोलन के मुख्य जमीनी मुद्दे और माँगें:
* आवारा पशुओं का जानलेवा आतंक (प्रमुख मांग): सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं के कारण आए दिन भीषण एक्सीडेंट हो रहे हैं। इन हादसों में बेकसूर मवेशी सड़कों पर तड़प-तड़प कर मरने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर भारी जन-धन की हानि हो रही है—कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और दर्जनों परिवार तबाह हो चुके हैं। किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो रही हैं। आवारा पशुओं के प्रबंधन के लिए तत्काल ठोस और स्थाई व्यवस्था की जाए।
* सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था: क्षेत्र में पूरी तरह चरमरा चुकी कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पिपराही पुलिस चौकी को तत्काल अपग्रेड कर पूर्ण ‘थाना’ बनाया जाए।
* बदहाल स्वास्थ्य व शिक्षा व्यवस्था: पिपराही हॉस्पिटल में तत्काल MBBS डॉक्टर की तैनाती की जाए ताकि गरीबों को इलाज के लिए भटकना न पड़े। साथ ही, क्षेत्र के बद से बदतर हो चुके स्कूलों की इमारतों और शिक्षा व्यवस्था को सुधारा जाए।
* सड़क व बुनियादी ढांचा: खस्ताहाल ग्रामीण सड़कों और क्षतिग्रस्त हो चुके पुल-पुलियाओं का अविलंब निर्माण कराया जाए। पिपराही में ग्राम ब्रह्मगढ़ को अविलंब जोड़ा जाए।
* बिजली संकट व भारी बिल: ग्राम ब्रह्मगढ़ में तत्काल थ्री-फेस (3-Phase) बिजली की आपूर्ति बहाल की जाए और क्षेत्र के गरीब किसानों को भेजे जा रहे अनियमित व बेतहाशा बिजली बिलों पर तुरंत रोक लगे।
* किसानों को खाद: बुआई के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों को खाद की निर्बाध और ब्लैक-मार्केटिंग मुक्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।नेताओं की दोटूक चेतावनी:
जिलाध्यक्ष एडवोकेट अनूप यादव और राष्ट्रीय सचिव राकेश सिंह यादव ने साफ शब्दों में कहा कि, “अब आश्वासन का समय खत्म हो चुका है। जब तक हमारी इन मांगों पर धरातल पर काम शुरू नहीं होता, तब तक पिपराही तिराहे से चक्का जाम नहीं हटेगा।” इस आंदोलन में मऊगंज और सीधी जिले के हजारों पीड़ित किसान, आक्रोशित नौजवान और आम जनता सड़कों पर उतरेगी। यदि प्रशासन ने इस शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक दबाने की कोशिश की, तो होने वाले उग्र जन-आंदोलन की संपूर्ण जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।



