क्राइमदेशधर्ममध्य प्रदेशराजनीतिराज्यलोकल न्यूज़

महाखुलासा: एमपी का ‘सच्चा सौदा’ बनेगा आनंदपुर धाम? 700 करोड़ का काला खेल और दरिंदगी की सनसनीखेज दास्तां

अशोक नगर

भोपाल/अशोकनगर: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के ईसागढ़ स्थित आनंदपुर धाम में आस्था की आड़ में चल रहे एक खौफनाक साम्राज्य का पर्दाफाश हुआ है। प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले में प्रशासनिक मिलीभगत और संगठित अपराध के गंभीर आरोप लगाए हैं।

1. दरिंदगी और शोषण का ‘अड्डा’…………..आश्रम पर दलित और आदिवासी समाज की महिलाओं और युवाओं के साथ यौन शोषण के अमानवीय आरोप लगे हैं। पीड़ितों का कहना है कि सुनील महात्मा, सोनू महात्मा और अवधेश भगत जैसे लोग डरा-धमकाकर उनका शारीरिक शोषण करते थे। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी और अश्लील वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग की जाती थी। यहाँ तक कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग (मानव तस्करी) की आशंका भी जताई गई है।

2. 700 करोड़ का चंदा और मनी लॉन्ड्रिंग। आरोप है कि आनंदपुर धाम ट्रस्ट को साल में करीब 700 करोड़ रुपये का दान मिलता है।

* काला धन: इस पैसे का इस्तेमाल प्रभावशाली अधिकारियों और रसूखदारों के काले धन को सफेद करने के लिए किया जा रहा है।

* सिंडिकेट: सीए विनु अग्रवाल पर मनी लॉन्ड्रिंग, दिल्ली के विनोद महात्मा पर ‘लैजनिंग’ और भोपाल के कारोबारी अमरीक सिंह पर हवाला लेनदेन के आरोप लगे हैं।

3. IAS अधिकारियों पर उठे सवाल।  ……………प्रदीप अहिरवार ने मामले में प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल उठाते हुए सीधे तौर पर तीन सीनियर IAS अधिकारियों— विवेक अग्रवाल, अवनीश लवानिया और मयंक अग्रवाल का नाम लिया है। उन्होंने पूछा कि क्या इन अधिकारियों का आश्रम से कोई गुप्त संबंध है, जो इतने बड़े सबूतों के बाद भी ईसागढ़ थाना और जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है?

4. जमीन लूट और अपराधियों को संरक्षण

* जमीन कब्जा: दलित-आदिवासियों की निजी जमीनों और सरकारी रास्तों पर अवैध कब्जे का आरोप है।

* शरणस्थली: पुलिस वेरिफिकेशन में खुलासा हुआ है कि आश्रम में हरियाणा और यूपी के हिस्ट्रीशीटर अपराधी रह रहे हैं, जिनका इस्तेमाल पीड़ितों को डराने के लिए किया जाता है।

* गौ-तस्करी: ट्रस्ट के ही लोगों ने पूर्व में डीजीपी को शिकायत कर यहाँ गौ-हत्या और तस्करी होने की बात कही थी।

कांग्रेस की चेतावनी: “CBI जांच हो”…प्रदीप अहिरवार ने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना हरियाणा के ‘सच्चा सौदा’ कांड से करते हुए मांग की है कि:

* मामले की जांच स्थानीय पुलिस के बजाय CBI से कराई जाए।

* पीड़ित परिवारों को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराई जाए।

* दोषी महात्माओं और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर FIR दर्ज हो।

> निष्कर्ष: यह मामला केवल एक आश्रम का नहीं, बल्कि दलितों के अधिकारों और महिलाओं की अस्मत से जुड़ा है। यदि सरकार ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह मध्यप्रदेश की कानून व्यवस्था पर एक बड़ा काला धब्बा साबित होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!