आदिवासी भूमि आवंटन के विरोध में जयस का आंदोलन तेज
211.408 हेक्टेयर भूमि उद्योग विभाग को देने के फैसले का विरोध, जनआंदोलन की चेतावनी

बदनावर (धार)। धार जिले के बदनावर क्षेत्र में 211.408 हेक्टेयर आदिवासी भूमि उद्योग स्थापना के लिए आवंटित किए जाने के विरोध में जयस एवं सर्व आदिवासी समाज ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भूमि आवंटन का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
ग्राम चिराखान, निंदवानिया पंचायत एवं भेरूपाड़ा क्षेत्र की भूमि उद्योग विभाग को आवंटित किए जाने के विरोध में ग्रामीणों और आदिवासी समाज ने राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर निर्णय को तत्काल निरस्त करने की मांग की है
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित भूमि पर आदिवासी परिवार वर्षों से खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। उनके अनुसार यह जमीन केवल खेती का साधन नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति, परंपरा, पहचान और अस्तित्व का आधार है। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्योग स्थापना से हजारों किसानों की आजीविका प्रभावित होगी।
ग्रामीणों ने क्षेत्र की बागेड़ी नदी एवं अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों पर भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि उद्योग लगने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ सकता है तथा जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
निंदवानिया ग्राम पंचायत की सरपंच रवीना बाई पग्गी एवं भेरूपाड़ा के सरपंच उदय सिंह गामड़ ने भी शासन-प्रशासन को आवेदन देकर भूमि आवंटन निरस्त करने की मांग की है। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि आदिवासी हितों और ग्रामीणों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
जयस संगठन ने कहा है कि मांगें नहीं मानी गईं तो चरणबद्ध आंदोलन, धरना-प्रदर्शन, जनजागरण अभियान एवं जनसंघर्ष शुरू किया जाएगा। संगठन ने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति के लिए शासन-प्रशासन जिम्मेदार होगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जयस धार जिलाध्यक्ष सुनील डाबर, जिला सचिव संतोष मुनिया, जिला महामंत्री विक्रम भाभर, जिला मीडिया प्रभारी अजय डावर, तहसील अध्यक्ष राहुल गिरवाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
फिलहाल, भूमि आवंटन को लेकर क्षेत्र में विरोध लगातार बढ़ रहा है और आदिवासी समाज ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया है।
