35 साल की शासकीय सेवा के बाद अपनाया बुद्ध का मार्ग, अब ‘स्मार्ट दास’ के नाम से करेंगे मानव कल्याण की सेवा
6 जून को आनंद बुद्ध विहार में होगा भव्य धम्म दीक्षा कार्यक्रम

मुरैना | MP ब्यूरो चीफ राजकुमार भारतीय
मुरैना जिले की सबलगढ़ तहसील के ग्राम डोंगरपुर निवासी हजारी प्रसाद कौशल ने 35 वर्षों की शासकीय सेवा पूर्ण करने के बाद अपना संपूर्ण जीवन बुद्ध, धम्म और संघ को समर्पित करने का निर्णय लिया है। जून 2026 में प्रव्रज्या ग्रहण करने के पश्चात अब वे “स्मार्ट दास” के नाम से जाने जाएंगे।
इस आध्यात्मिक यात्रा के तहत श्योपुर जिले के आनंद बुद्ध विहार में 6 जून 2026, शनिवार को एक भव्य प्रव्रज्या एवं धम्म दीक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु बौद्ध धर्म की शरण ग्रहण कर सम्यक धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेंगे।
हजारी प्रसाद कौशल ने अपने शासकीय जीवन की शुरुआत शासकीय माध्यमिक विद्यालय चिलवानी में शिक्षक के रूप में की थी। वर्ष 1991 में ग्रामीण उद्यान विकास अधिकारी के पद पर नियुक्त होकर उन्होंने भोपाल, सीहोर, रायसेन और श्योपुर जिलों में अपनी सेवाएं दीं। उद्यान विभाग में उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें वर्ष 2017 में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित भी किया गया था।
शासकीय सेवा के दौरान वे भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से प्रभावित हुए और श्योपुर स्थित कबीर आश्रम से जुड़कर कबीर साहेब के आध्यात्मिक ज्ञान का अध्ययन किया। वर्ष 2018 में उन्होंने कबीर पंथ की दीक्षा ग्रहण की और “स्मार्ट दास” नाम से सामाजिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने मानवता, समानता और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।
अप्रैल 2025 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने तथागत गौतम बुद्ध के धम्म मार्ग को अपनाने का निर्णय लिया। जून 2025 में भोपाल स्थित धम्मपाल विपश्यना केंद्र में पहली विपश्यना साधना करने के बाद उन्होंने जयपुर (चाकसू), बालाघाट, श्रीगंगानगर, जूनागढ़, कानपुर, नागपुर तथा बोधगया सहित देश के विभिन्न प्रमुख विपश्यना केंद्रों में ध्यान साधना एवं धम्म अध्ययन किया।
लगातार साधना, आत्ममंथन और आध्यात्मिक चिंतन के पश्चात जून 2026 में उन्होंने प्रव्रज्या ग्रहण कर अपना संपूर्ण जीवन बुद्ध, धम्म और संघ की सेवा तथा मानव कल्याण के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया।
हजारी प्रसाद कौशल का यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सेवा, आध्यात्मिकता और मानव कल्याण के मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।

