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खुलासा :- गेहूं-आटे में घाटा, तो बना डाली MD ड्रग फैक्ट्री!

अशोकनगर में जंगलों के बीच चल रही थी MD ड्रग लैब

बड़ी बात:- पाप पकड़ा गया तो ‘लावारिस’ हुआ कार्यकर्ता!

अशोक नगर/ MP :-   गाड़ी पर BJP की नेमप्लेट, रैलियों में जिंदाबाद के नारे; पर ड्रग्स फैक्ट्री मिलते ही अध्यक्ष बोले- ‘हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं’

अशोकनगर | राजनीति का दस्तूर भी अजीब है। जब तक कार्यकर्ता भीड़ बढ़ाता है, वह ‘रीढ़ की हड्डी’ होता है, लेकिन जैसे ही वह ड्रग्स के साथ दबोचा जाता है, वह अचानक ‘अजनबी’ हो जाता है। अशोकनगर में पकड़ी गई एमडी ड्रग्स फैक्ट्री के मामले में भी यही हुआ। आरोपी की गाड़ी पर लगी ‘भाजपा युवा मोर्चा उपाध्यक्ष’ की नेमप्लेट चीख-चीखकर सत्ता का रसूख बयां कर रही थी, लेकिन जिलाध्यक्ष आलोक तिवारी के एक बयान ने उसे ‘सियासी अनाथ’ बना दिया।

जिलाध्यक्ष की ‘सफाई’ vs जनता की ‘दुविधा’ आलोक तिवारी (भाजपा जिलाध्यक्ष) का तर्क:

इस व्यक्ति का भाजपा से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है। आज के दौर में कोई भी अपनी गाड़ी पर नेमप्लेट लगा सकता है। पार्टी ऐसे किसी भी अवैध काम का समर्थन नहीं करती और पुलिस को पूरी कार्रवाई करनी चाहिए।”

जनता का सुलगता सवाल:…..साहब! अगर कोई ऐरा-गैरा आपकी पार्टी की नेमप्लेट लगाकर हफ्तों तक शहर में घूमता है, रसूख झाड़ता है और अफसरों पर धौंस जमाता है, तो आपका खुफिया तंत्र क्या कर रहा था? क्या तब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई जब तक पुलिस ने उसे रंगे हाथों नहीं दबोचा?

🚨 रसूख की आड़ में ‘सफेदपोश’ जहर

आरोपी ने बड़ी चतुराई से ‘सत्ता’ को ढाल बनाया था। सूत्रों की मानें तो:

* पुलिस का खौफ खत्म: गाड़ी पर भाजपा की प्लेट देखकर नाकों पर चेकिंग करने वाले भी अक्सर सलाम ठोक कर छोड़ देते थे। इसी का फायदा उठाकर इंदौर से केमिकल लाया गया।

* भगवा गमछे की ओट: अवैध धंधे को छुपाने के लिए आरोपी पार्टी की हर छोटी-बड़ी गतिविधियों में सक्रिय रहता था ताकि समाज की नजरों में उसकी ‘छवि’ एक नेता की बनी रहे।

* यूट्यूब बना गुरु, सत्ता बनी कवच: तकनीक का इस्तेमाल ड्रग्स बनाने में किया और सत्ता का इस्तेमाल उसे छुपाने में।

 ‘वाशिंग मशीन’ में खराबी या नया बहाना?…..अक्सर देखा गया है कि गलत काम करने वाले लोग भगवा चोला ओढ़ लेते हैं ताकि उनके काले कारनामों पर पर्दा पड़ा रहे।    अशोकनगर का यह मामला बताता है कि अपराधी अब ‘आत्मनिर्भर’ होने के लिए यूट्यूब से नुस्खे देख रहे हैं और ‘सुरक्षा’ के लिए सत्ताधारी दल की नेमप्लेट। जिलाध्यक्ष की सफाई भले ही संगठन को बचाने की कोशिश हो, लेकिन शहर की गलियों में चर्चा है कि— “बिना संरक्षण के जंगल में ड्रग्स की फैक्ट्री लगाना मुमकिन नहीं।”

अब इन सवालों के जवाब कौन देगा ?….अगर वह भाजपा का नहीं था, तो क्या पार्टी ने उसके खिलाफ ‘नेमप्लेट’ के दुरुपयोग की एफआईआर पहले कभी करवाई?

 * इंदौर से आने वाले केमिकल का ‘असली मास्टरमाइंड‘ कौन है? क्या पुलिस उन सफेदपोशों तक पहुंचेगी जो इस आरोपी के साथ रैलियों में कंधे से कंधा मिलाकर चलते थे?

:पुलिस अब आरोपी की कॉल डिटेल (CDR) खंगाल रही है। अगर कॉल रिकॉर्ड के पन्ने खुले, तो क्या उचित कार्यवाह होगी

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