UGC के हक में उठे थे हाथ, पुलिस ने बरसाए लट्ठ; सड़कों पर लहूलुहान हुआ लोकतंत्र!
भोपाल बना अखाड़ा: लाठियों के दम पर कब तक दबेगी आवाज?

भोपाल में ‘बैटलफील्ड’: हक मांग रहे युवाओं पर बरसीं लाठियां, पानी की बौछार से दबाई आवाज!
सत्ता का ‘हंटर’ या लोकतंत्र की हत्या? सीएम आवास घेरने निकले भीम आर्मी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने सड़क पर घसीटा; कई लहूलुहान
संविधान समाचार न्यूज | भोपाल …….राजधानी की सड़कें सोमवार को एक बार फिर लोकतंत्र के ‘दमन’ की गवाह बनीं। अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे यूजीसी समर्थकों और भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने उस वक्त कहर बरपा दिया, जब वे मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे। आलम यह था कि पुलिस ने न उम्र देखी, न जज्बा; बस लाठियां भांजीं और बर्फीले पानी की बौछारों से युवाओं के जोश को ठंडा करने की कोशिश की।
ग्राउंड रिपोर्ट: जब नारों की गूंज पर भारी पड़ा पुलिस का ‘बल’ दोपहर 2:00 बजे: अंबेडकर मैदान से जय भीम के नारों के साथ सैलाब उमड़ा।
* दोपहर 2:45 बजे: पुलिस ने पहला बैरिकेड लगाया, जिसे प्रदर्शनकारियों ने चंद मिनटों में ढहा दिया।
* दोपहर 3:15 बजे: पुलिस ने बिना किसी बड़ी चेतावनी के ‘वॉटर कैनन’ खोल दी। कड़ाके की ठंड और पानी की मार से कई कार्यकर्ता सड़क पर गिर पड़े।
* शाम 4:00 बजे: तितर-बितर होती भीड़ पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। जवाब में प्रदर्शनकारियों ने भी जमकर नारेबाजी की।
भीम आर्मी का सीधा वार: “यह सरकार कायर है”
मल्हारगंज तहसील संयोजक हर्ष रवि चौधरी ने फटे कपड़ों और खून से सने माथे के साथ दहाड़ते हुए कहा— “हम कोई अपराधी नहीं, इस देश के नागरिक हैं। सत्ता के इशारे पर पुलिस ने हमें जानवरों की तरह पीटा है। लाठियों से सिर फोड़ सकते हो, लेकिन हमारे हौसले नहीं।”
संविधान समाचार विशेष: 3 बड़े सवाल जो सरकार से..
* संवाद क्यों नहीं? अगर युवा अपनी मांग लेकर आ रहे थे, तो लाठी चलाने से पहले किसी जिम्मेदार मंत्री ने उनसे बात क्यों नहीं की?
* पुलिसिया बर्बरता: क्या भीड़ को नियंत्रित करने का एकमात्र तरीका सिर पर लाठियां मारना ही बचा है?
* आंदोलन कुचलने की जिद: सत्ता के गलियारों में बैठे लोग आखिर यूजीसी के इन नियमों से इतने डरे हुए क्यों हैं?
“प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह से एकतरफा थी। यह लोकतंत्र नहीं, तानाशाही का ट्रेलर है। मांगें नहीं मानी गईं तो पूरे प्रदेश का चक्का जाम होगा।”— आंदोलनकारी नेता।
प्रशासन का पक्ष: “कानून-व्यवस्था को खतरा था, इसलिए हल्का बल प्रयोग किया गया। प्रदर्शनकारियों को बार-बार रुकने की चेतावनी दी गई थी।” — पुलिस अधिकारी

