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अशोकनगर में बरसी ‘न्याय’ की हुंकार: OBC-SC-ST समाज की महापंचायत में उमड़ी हजारों की भीड़

यूजीसी आन्दोलन अशोक नगर में

*अशोकनगर। ​दीना भाना जयंती पर एकजुटता: 16 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा; बोले वक्ता- ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उतनी उसकी हिस्सेदारी’

जिले में रविवार को सामाजिक न्याय का एक बड़ा स्वर गूंजा। अवसर था जननायक दीना भाना जी की जयंती का, जिसे ओबीसी, एससी और एसटी समाज के संगठनों ने ‘विशाल महासम्मेलन’ के रूप में मनाया। शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए समाजजन आयोजन स्थल पहुंचे, जहां पैर रखने तक की जगह नहीं बची। कार्यक्रम के बाद संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को 16 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा, जिसमें जातिगत जनगणना से लेकर बैकलॉक पदों को भरने तक की हुंकार शामिल थी।

5 बड़ी मांगें। जातिगत जनगणना: ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम की मांग ताकि सटीक जनसंख्या स्पष्ट हो सके।

आरक्षण का पेंच: लोकसभा और विधानसभा में ओबीसी को आरक्षण देने और वर्तमान में अटके (Hold) आरक्षण को बहाल करने की मांग।

शिक्षा का अधिकार: यूजीसी कानून का प्रभावी क्रियान्वयन और लंबित छात्रवृत्ति का तुरंत भुगतान।

ठेका प्रथा का अंत: सफाई कामगारों को ठेका प्रथा से मुक्त कर नियमित करने और आउटसोर्स बिल को निरस्त करने पर जोर।

आस्था और अधिकार: करीला धाम को पुनः ‘वाल्मीकि धाम’ घोषित कर समाज को इसका प्रबंधन सौंपने की मांग।

मंच से सीधा प्रहार: ‘यह दल विशेष के खिलाफ नहीं, अधिकार की लड़ाई है’

​सभा को संबोधित करते हुए प्रमुख वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं है। यह संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक सम्मान की रक्षा का संकल्प है। वक्ताओं ने कहा कि जब तक पिछड़ा वर्ग और दलित-आदिवासी समाज को उनकी जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक और शैक्षणिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक सामाजिक न्याय की अवधारणा अधूरी रहेगी।

एकजुटता का संदेश: ओबीसी, एससी और एसटी संगठनों का एक मंच पर आना भविष्य की नई राजनीतिक ध्रुवीकरण की ओर इशारा कर रहा है।

प्रशासन पर दबाव: 16 सूत्रीय ज्ञापन में जमीनी मुद्दों (जैसे यूजीसी कानून, आरक्षण आवासीय पट्टे और संविदा बिल) को शामिल कर प्रशासन को सीधी चुनौती दी गई है।

शांतिपूर्ण शक्ति प्रदर्शन: हजारों की भीड़ के बावजूद कार्यक्रम का शांतिपूर्ण समापन समाज की संगठनात्मक परिपक्वता को दर्शाता है।

प्रशासन का पक्ष: ‘उचित कार्रवाई का भरोसा’

​महासम्मेलन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। अधिकारियों ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए समाजजनों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को वरिष्ठ स्तर पर भेजा जाएगा और नियमानुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 

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