करीला धाम का नाम ‘वाल्मीकि धाम’ करने की मांग तेज, आंदोलन की चेतावनी |
नाम बदलो या आंदोलन झेलो: करीला धाम को लेकर वाल्मीकि समाज का अल्टीमेटम |

📍 अशोकनगर, 12 अप्रैल 2026 |
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल करीला धाम एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। वाल्मीकि समाज ने इस ऐतिहासिक स्थल का नाम बदलकर ‘वाल्मीकि धाम’ या ‘वाल्मीकि आश्रम’ किए जाने की जोरदार मांग उठाई है। साथ ही मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
📌 क्या है पूरा मामला?
वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि करीला धाम का सीधा संबंध महर्षि वाल्मीकि से है, इसलिए वर्तमान नाम इस स्थल की ऐतिहासिक पहचान को पूरी तरह प्रदकरीला_धामर्शित नहीं करता। समाज ने प्रमुख रूप से तीन मांगें रखी हैं:
धाम का नाम बदलकर ‘वाल्मीकि धाम’ किया जाए
मंदिर ट्रस्ट में वाल्मीकि समाज की भागीदारी सुनिश्चित की जा
ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर समाज को प्रतिनिधित्व दिया जाए
📜 ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
मान्यता है कि यह वही स्थान है जहां महर्षि वाल्मीकि का आश्रम स्थित था। धार्मिक कथाओं के अनुसार, माता सीता ने वनवास के दौरान यहीं शरण ली थी और यहीं लव-कुश का जन्म एवं शिक्षा-दीक्षा हुई थी। इसी आधार पर समाज इस स्थान का नाम परिवर्तन उचित मानता है।
⚖️ प्रबंधन पर उठे सवाल
वाल्मीकि समाज ने मंदिर प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि धाम के संचालन में समाज की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि ट्रस्ट पर लंबे समय से एक ही समूह का प्रभाव बना हुआ है, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा है।
🔥 प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
दीना भाना बहुजन संगठन के संस्थापक प्रकाश नहारिया और प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र घावरी ने स्पष्ट कहा है कि:
“यदि हमारी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे मध्य प्रदेश में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।”
नेताओं ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को न्यायालय में ले जाया जाएगा।
📝 निष्कर्ष
करीला धाम के नाम परिवर्तन को लेकर उठी मांग ने सामाजिक और धार्मिक बहस को फिर से तेज कर दिया है। अब सबकी नजर प्रशासन और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।

