रीवा का अस्पताल चौराहा बना जाम का केंद्र, एंबुलेंस तक फंसी; ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे सवाल
स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले की ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा शहर का अस्पताल चौराहा इन दिनों लगातार लगने वाले जाम के कारण चर्चा में है। यह चौराहा शहर के सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज, एंबुलेंस और आम नागरिक गुजरते हैं। बावजूद इसके, यहां अक्सर वाहनों की लंबी कतारें लगने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल चौराहे पर जाम की समस्या अब सामान्य हो चुकी है। कई बार एंबुलेंस भी ट्रैफिक में फंस जाती हैं, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में देरी होने की आशंका बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आपातकालीन चिकित्सा में कुछ मिनटों की देरी भी मरीज के जीवन के लिए जोखिम बढ़ा सकती है।
यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रीवा, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री Rajendra Shukla का गृह जिला है। वहीं मुख्यमंत्री Mohan Yadav लगातार सड़क दुर्घटना में घायलों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाने और समय पर उपचार उपलब्ध कराने पर जोर देते रहे हैं। ऐसे में अस्पताल तक पहुंचने वाले प्रमुख मार्ग पर लगातार जाम लगना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि ट्रैफिक प्रबंधन को प्रभावी बनाने के बजाय कई स्थानों पर जांच अभियान पर अधिक ध्यान दिया जाता है, जबकि अस्पताल चौराहे जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में यातायात सुचारु रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था दिखाई नहीं देती। नागरिकों ने मांग की है कि इस चौराहे पर स्थायी ट्रैफिक प्रबंधन, सिग्नल व्यवस्था और एंबुलेंस के लिए निर्बाध ग्रीन कॉरिडोर जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन अस्पताल चौराहे पर लगातार लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएगा? क्या एंबुलेंस और आपातकालीन वाहनों के लिए निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जाएगा? और क्या शहरवासियों को रोजाना की ट्रैफिक समस्या से राहत मिल पाएगी?
(रीवा से पंडित विकास की रिपोर्ट, संविधान समाचार)


