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दुर्ग में राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ: शिक्षक शिक्षा में भारतीय ज्ञान प्रणाली से लैंगिक समानता पर मंथन

देशभर के शिक्षाविद दुर्ग में सम्मेलन में हुए शामिल

राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ: “भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) को शिक्षक शिक्षा में एकीकृत कर लैंगिक समानता को बढ़ावा”

दुर्ग, छत्तीसगढ़ 13 मार्च 2026

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग (छ.ग.) एवं आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन, भारत के संयुक्त तत्वावधान में चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ आज हुआ। सम्मेलन का विषय है “Integrating Indian Knowledge System (IKS) in Teacher Education for Promoting Gender Equality”।

उद्घाटन सत्र का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. आर.के. शुक्ला (पूर्व प्रोफेसर एवं प्रमुख, PSSCIVE, NCERT, भोपाल) के स्वागत भाषण से हुआ।

इसके पश्चात् अतिथि स्वागत एवं परिचय के बाद प्रो. आशा शुक्ला (मैनेजिंग डायरेक्टर, APPHF इंडिया एवं पूर्व कुलपति, BRAUSS) ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की।

मुख्य वक्तव्य ऑनलाइन माध्यम से प्रो. मनोज कुमार सक्सेना (वरिष्ठ प्रोफेसर, शिक्षा एवं प्रॉक्टर, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश, धर्मशाला) ने दिया।

मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. साकेत कुशवाहा (कुलपति, लद्दाख विश्वविद्यालय, लेह) ने अपने विचार साझा किए।

अध्यक्षीय उद्बोधन प्रो. संजय तिवारी (कुलपति, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग) ने दिया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसे डॉ. भूपेंद्र कुलदीप (रजिस्ट्रार, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग) ने प्रस्तुत किया।

सत्र का संचालन डॉ. सुषमा दुबे (श्री शंकराचार्य महाविद्यालय, दुर्ग) ने किया।

दूसरा सत्र : Reimagining Teacher Education through IKS Lens

विषय पर आयोजित हुआ। सत्र की अध्यक्षता प्रो. अमित कुमार जायसवाल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, बी.एड विभाग, डीन, संकाय शिक्षा, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, गोपेश्वर चमोली द्वारा की गई। विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रो. आशा शुक्ला, पूर्व कुलपति, BRAUSS एवं प्रबंध निदेशक, आशा पारस फॉर पीस एंड हारमनी फाउंडेशन, भारत, डॉ. हिमानी उपाध्याय, पूर्व विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग, हवाबाग कॉलेज, जबलपुर एवं डॉ. रोचना शुक्ला, सहायक प्राध्यापक, स्कूल ऑफ एजुकेशन, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर द्वारा अपने वक्तव्य प्रदत्त किए। संचालन एवं अंत में आभार ज्ञापन लव चावड़ीकर द्वारा प्रदत्त किया।

इस सत्र ने शिक्षक शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश की संभावनाओं पर गहन विमर्श का अवसर प्रदान किया। प्रतिभागियों ने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा प्रणाली को अधिक सशक्त, सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए IKS दृष्टिकोण का समावेश आवश्यक है।

यह सम्मेलन 13 से 16 मार्च 2026 तक चलेगा, जिसमें भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षक शिक्षा में समाहित कर लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करने पर विभिन्न विद्वानों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा।

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