श्योपुर में अनोखी पहल: न दहेज, न सोने-चांदी के गहने… संविधान और बुद्ध धम्म की किताबों से पक्का हुआ रिश्ता
युवाओं के लिए बनी मिसाल, दहेज मुक्त समाज और वैचारिक रिश्तों की ओर बढ़ाया प्रेरक कदम।

श्योपुर | एमपी ब्यूरो चीफ : राजकुमार भारतीय
जहां आज के दौर में सगाई और विवाह समारोहों में दहेज, महंगे उपहार और दिखावे की प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है, वहीं मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के वीरपुर (सबलगढ़) स्थित आनंद बुद्ध विहार में एक ऐसा अनोखा सगाई समारोह आयोजित हुआ जिसने समाज को नई दिशा देने का संदेश दिया।
6 जून 2026 को संपन्न हुए इस समारोह में डॉ. जे.डी. सूर्यवंशी एवं एडवोकेट आकाश राज कौशल के रिश्ते को धन-दौलत, सोने-चांदी या दहेज से नहीं, बल्कि संविधान और बुद्ध धम्म के विचारों से मजबूत बनाया गया। पूरे कार्यक्रम में न दहेज की मांग हुई, न महंगे उपहारों का आदान-प्रदान और न ही किसी प्रकार का दिखावा देखने को मिला।
संविधान और बुद्ध धम्म की पुस्तकों का हुआ आदान-प्रदान
इस सगाई समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उपासक पक्ष ने भारतीय संविधान की पुस्तक भेंट कर समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों को रिश्ते की नींव बनाया। वहीं उपासिका पक्ष ने बुद्ध धम्म की पुस्तक भेंट कर करुणा, मैत्री, शांति और मानवता के संदेश को जीवन का आधार बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
समारोह में मौजूद लोगों ने इसे केवल पुस्तकों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच विचारों और सामाजिक मूल्यों का आदान-प्रदान बताया।
धम्म पट्टी पहनाकर किया स्वागत, तालियों से गूंजा बुद्ध विहार
कार्यक्रम के दौरान दोनों परिवारों ने एक-दूसरे को धम्म पट्टी पहनाकर सम्मानित किया। प्रेम, समानता और भाईचारे के इस प्रतीकात्मक स्वागत ने समारोह को और भी भावुक बना दिया। उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस पहल का स्वागत किया और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
दहेज प्रथा के खिलाफ दिया मजबूत संदेश
समारोह में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्ध उपासकों ने कहा कि आज दहेज जैसी कुप्रथा समाज के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे समय में इस प्रकार की सादगीपूर्ण और विचार आधारित सगाई समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि युवा पीढ़ी दहेज मुक्त विवाह और समानता आधारित रिश्तों को अपनाए तो समाज से दहेज जैसी बुराइयों को समाप्त किया जा सकता है।
कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
उपासिका पक्ष की ओर से भूरेलाल चौधरी (पूर्व जनपद सदस्य), केसरी सिंह (पूर्व सरपंच), तूफान सिंह, कमल सिंह भगत, विजय सिंह, सम्पत बाई, इंजीनियर सूर्यदेव जयसिंह, रचना सुमन, सविता, जानवी, चंद्रदेव, सत्यदेव, कोमल बाई, सुप्रिया बौद्ध, कुसुम सूर्या एवं विक्रम सिंह सहित अनेक परिजन उपस्थित रहे।
वहीं उपासक पक्ष की ओर से परम पूज्य भंते स्मार्ट बोधि, किरण देवी कौशल (पूर्व सरपंच), मलूका जी (सरपंच), गंगाराम सोलंकी, रामजी लाल, डॉ. दिनेश मौर्य, भारती मौर्य, कमल जाटव, रविराज सिंह कौशल, धारा सिंह कौशल और राघवेंद्र कौशल सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
भंते ने अपने आशीर्वचन में कहा कि समाज में वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है जब लोग बुद्ध, धम्म और भारतीय संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं।
बुद्ध उपासकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की रही बड़ी भागीदारी
इस ऐतिहासिक आयोजन में नरेंद्र रायपुरिया (सचिव, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय), पत्रकार राजकुमार भारतीय, एडवोकेट राय सिंह सहित बड़ी संख्या में बुद्ध उपासक, सामाजिक कार्यकर्ता और क्षेत्रीय नागरिक उपस्थित रहे।
सिर्फ सगाई नहीं, सामाजिक परिवर्तन की नई शुरुआत
आनंद बुद्ध विहार में संपन्न यह आयोजन अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं बल्कि समानता, शिक्षा, करुणा और सामाजिक न्याय के विचारों का संगम है।
बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय के सिद्धांतों और तथागत गौतम बुद्ध के मानवता एवं करुणा के संदेश को अपनाकर संपन्न हुई यह अनोखी सगाई आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।
जब रिश्ते विचारों से जुड़ते हैं, तब समाज बदलने की शुरुआत होती है। वीरपुर की यह अनोखी सगाई उसी सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिख रही है।
संविधान समाचार संपादक -राजकुमार भारतीय